Skip to main content

घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

अमरीका में कोविड-19 का टीका लगाने से 6 लोगों की हुयी मौत 6 killed in America due to vaccination of Covid-19


अमरीका के फ़ूड ऐन्ड ड्रग ऑर्गनाइज़ेशन ने बताया है कि देश में फ़ाइज़र-बायोएनटेक कंपनी के टीका लगने के दौरान 6 लोगों की मौत हो गयी।

तस्नीम न्यूज़ के मुताबिक़, फ़ाइज़र कंपनी ने अपने टीके के कोरोना वायरस से निपटने में 95 फ़ीसद कामयाब होने का एलान किया था, लेकिन अमरीका के फ़ूड ऐन्ड ड्रग ऑर्गनाइज़ेशन का कहना है कि इस देश में हफ़्ते के अंत तक अब तक 6 लोगों की कोरोना के टीके लगवाने से मौत हो चुकी है।  ये लोग फ़ाइज़र के टीके के टेस्ट होने की प्रक्रिया में अपनी मर्ज़ी से शामिल हुए थे। फ़ाइज़र अमरीकी कंपनी है और बायोएनटेक जर्मन कंपनी है। इन दोनों ने मिल कर कोरोना का टीका बनाया है।
स्पुतनिक न्यूज़ के मुताबिक़, इन 6 लोगों में 2 लोगों की तो टीका लगते ही मौत हो गयी जबकि बाक़ी 4 की टीका इस्तेमाल करने के कुछ दिन के भीतर मौत हुयी।

मरने वालों में ज़्यादातर की उम्र 55 साल से ज़्यादा थी। एक की ब्रेन हैम्रेज से, एक की आथ्रोस्क्लोरोसिस से और दो की हार्ट अटैक से मौत हुयी।
ब्रिटेन के बाद अब अमरीकी फ़ूड ऐन्ड ड्रग ऑर्गनाइज़ेशन ने भी उन लोगों को फ़ाइज़र-बायोएनटेक का टीका लगाने से मना किया है जिनको एनाफ़िलैक्सिस नामी एलर्जी है। यह ऐसी एलर्जी है जो ख़ास दवा और खाने पीने की कुछ चीज़ों से होती है। 










Comments

Popular posts from this blog

"विश्व अली असग़र दिवस" मोहर्रम की पहली तारीख़ मनाया जाएगा

"अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष 22 सितम्बर शुक्रवार को 41 देशों में एक साथ मनाया जाएगा। "अली असग़र विश्व दिवस" कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था के अध्यक्ष दाऊद मनाफ़ी ने एक प्रेसवार्ता में बताया है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) के 6 महीने के दूध पीते बेटे हज़रत अली असग़र (अ) की याद में आयोजित होने वाले "अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की पहली तारीख़ अर्थात 22 सितम्बर शुक्रवार को ईरान सहित दुनिया के 41 देशों में मनाया जाएगा।   संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि अली असग़र विश्व दिवस के अवसर पर ईरान से छोटे बच्चों के पहनने के लिए तैयार सफ़ेद और हरे रंग के लगभग एक लाख कपड़े दुनिया के 41 देशों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया हज़रत अली असग़र के नाम से "अली असग़र विश्व दिवस" का आयोजन करने वाली उनकी संस्था ने दुनिया की आठ भाषाओं जिनमें, अरबी, उर्दू, अंग्रेज़ी, रूसी, आज़री, तुर्की इस्तांबूली, स्वाहिली और  हौसा भाषा हैं। इस संस्था ने एक किताब भी प्रकाशित की है जिसके द्वारा दुनियाभर के लोगों तक इमाम हुसैन (अ) और हज़रत ...

3 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via Syed Haider Ali Molai

ईरान के अज़ादारो के कुछ अनोखे चित्र

Join Us :Live All Over World 's Azadari.Com

4 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via -  Mr Ali Haider

विश्व अहलेबैत (अ) परिषद का सन्देश अपनी मजलिसों में चरमपंथी टोलों के असली चेहरे को दुनिया वालों के सामने स्पष्ट करें

अहलेबैत (अ) न्यूज़ एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के '' दम्माम '' और '' सीहात '' के इमाम बारगाह '' हैदरिया '' और '' मस्जिद अलहमज़ा '' में अज़ादारों पर आतंकवादी हमलों के बाद वर्ल्ड अहले बैत (अ) एसेंबली ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर के अज़ादारों को कुछ निर्देश दिए हैं। परिषद ने अपने बयान में इस घटना की निंदा करते हुए इमाम बाड़ों और मस्जिदों से प्रशासन समितियों, संघों और अज़ादारों से अपील की है कि खुद मजलिसों और अपने कार्यक्रमों की रक्षा करें और किसी देश की सुरक्षा पर भरोसा मत करें। अहलेबैत (अ) परिषद ने ताकीद की है कि लगातार इस तरह की जानलेवा घटनाएं इस बात का प्रतीक है कि क्षेत्र की कुछ सरकारें, अहलेबैत (अ) के अनुयायियों की रक्षा या करना नहीं चाहती या ताक़त नहीं रखतीं। बयान का पूरा अनुवाद     बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम بسم الله الرحمن الرحیم «وما نقموا منهم إلا أن يؤمنوا بالله العزيز الحميد». एक बार फिर हज़रत सैयदुश् शोहदा इमाम हुसैन अ. की अज़ादारी की मजलिसों को समय के यज़ीदयों ने अपने आतंकवादी हमलों का ...

شیعہ نسل کشی کا قرانی راه حل- استاد محترم سید جواد نقوی शिया नरसंहार से बचने का कुरानी समाधान

  Pakiatan मे एक कोयला खान पर हमला करके 11 शिया खान मज़दूरों कि हत्या करदी

आतंवाद की आग से 10 लाख से अधिक निर्दोष शिया मुसलमान मारे जा चुके हैं

ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी MI-6 के पूर्व प्रमुख ने एक बड़ा रहस्योद्घाटन करते हुए कहा है कि सऊदी अरब की ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष ने हिटलर की शैली में शिया मुसमानों के नरसंहार की योजना बनाई थी। अल-आलम की रिपोर्ट के मुताबिक़, MI-6 के पूर्व प्रमुख ने तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश के गठन की साज़िश से पर्दा उठाते हुए कहा, सऊदी अरब की ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख बंदर बिन सुल्तान ने कहा था कि नाज़ियों ने जो कुछ यहूदियों के साथ किया था, हम शियों और अलवियों के साथ भी वैसा ही करेंगे। द इंडीपेंडेट अख़बार ने रिचर्ड डीयरलव के हवाले से लिखा है कि रियाज़ ने उत्तरी इराक़ पर क़ब्ज़े के लिए दाइश की सहायता की, क्योंकि उसका यह क़दम शिया मुसलमानों के जनसंहार की योजना का ही भाग था। डीयरलव ने पिछले हफ़्ते एक ब्रितानी संस्था से कहा था कि 11 सितम्बर 2001 की न्यूयॉर्क की घटना से पहले बंदर बिन सुल्तान ने मुझसे कहा था कि मध्यपूर्व में वह दिन दूर नहीं है कि जब एक अरब से अधिक सुन्नी शियों को सफ़ाया कर देंगे। डीयरलव ने उल्लेख किया कि बंदर बिन सुल्तान की योजना व्यवहारिक हो रही है और 2003 के बाद से आत्मघ...

عزاداری صرف ماتم داری کا نام نہیں ہے بلکہ انسانیت کے پرچم کو بلند کرنے کا نام عزاداری ہے - عظمت عابدی

  आजादारी सिर्फ मातम का नाम नहीं, इंसानियत का झंडा फहराना ही आजादारी है